वायार किसे कहते हैं
वायर ( wire ) को हिंदी में तार कहते है यह बहुत ही ज्यादा कठोरता से खींचा गया धातु होता है जिसे जरूरत के हिसाब से मोटा या पतला बनाया जाता है। वातावरण के प्रभाव से बचाव के लिए इन तारों के ऊपर इंसुलेटर को लपेट दिया जाता है।
वायर एक ऐसी उक्ति है जिसे हिंदी में तार कहते है इसकी सहायता से किसी भी उपकरण को बिजली से जोड़ सकते है वायर को आवश्यकता और वातावरण के हिसाब से अलग अलग धातु से बनाया जाता है जैसे एलुमिनियम, तांबा, लोहा, आदि से बनाया जाता है वही कुछ वायर को बनाने के लिए धातु को अन्य धातु जसे यूरेका, स्टील, निकिल टीन, इत्यादि धातुओं के मिश्रण से बनाया जाता है, जिस कारण से इनका नाम और प्रकार भी अलग अलग हैं।
वायर कितने प्रकार के होते है
दोस्तों आज हम यह जानेंगे की वायर कितने प्रकार के होते हैं। जरूरत के हिसाब से अलग अलग वायरों का प्रयोग किया जाता है आम तौर पर वायर 2 प्रकार की होती है 1. नंगा वायर, 2. इंसुलेटेड वायर। जिन्हें जरूरत के हिसाब से अलग अलग क्षमता और सुरक्षा के गुणों के साथ 51 तरीकों से बनाया जाता है। सामान्यत: उपकरणों के लिए 9 प्रकार की वायर का प्रयोग किया जाता है।
8 प्रकार की वायर निम्न हैं:-
- G.I WIRE - जी. आई तार
- Fuse Wire - फ्यूज तार
- Yureka Wire - यूरेका तार
- Nichrome wire - नाइक्रोम तार
- ACSR वायर ACSR तार
- C.T.S वायर - सी.टी.एस तार
- Winding wire - वाइंडिंग वायर
- V.I.R Wire वी.आई.आर. तार
- Lead sheathed wire.
वायर के प्रकार - विस्तृत जानकारी
1. G.I Wire जी.आई. तार-
इस तार का पूरा नाम गलवानिसेड आयरन वायर है इस तरह के तारों को बनाने के लिए लोहे की तारों के ऊपर जस्ते की परत चढ़ा दी जाती है। लोहे का प्रतिरोध तांबे की तुलना में 8 गुना अधिक होता है। सस्ता और मजबूत होने के कारण टेलीफोन लाइनों और अर्थ इन लाइन में 6 या 8 SWG का जी. आई तार प्रयोग किया जाता है।
2. Fuse wire फ्यूज तार-
इसको विद्युत परिपथओं में सुरक्षात्मक युक्ति के रूप में छोटी गलनांक वाली मिश्र धातु का तार, फ्यूज तार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा तांबे और एलुमिनियम के तारों को भी फ्यूज तार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. Yureka wire – यूरेका तार-
60% तांबा और 40% निकेल धातु से मिलकर तैयार किया गया तार यूरेका तार कहलाता है। इसका उपयोग प्रतिरोधक बनाने के लिए किया जाता है।
4. Nichrome – नाइक्रोम तार-
Nichrome wire 80% निकेल 20% क्रोमियम धातु से मिलकर तैयार किया गया तार, नाइक्रोम तार कहलाता है। इसका इस्तेमाल हीटिंग एलिमेंट बनाने के लिए किया जाता है।
5. V.I.R वायर
टिन आलेपित तांबे के तार पर वल्कैनाइज्ड इंडिया रबर का आवरण उस पर सूती धागे की बुनाई की जाती है और उस पर बिटूमन पदार्थ का लेप चढ़ाकर वी.आई.आर केबिल तैयार की जाती है इसका उपयोग केसिंग कैपिंग कण्ड्यूट पाइप एवं अस्थाई प्रकार की विद्युत वायरिंग में किया जाता है।
6. CTS वायर
इस तार का पूरा नाम कैब टाइप सीठ तार है इसे तांबे के तार पर वल्केनाइज्ड इण्डियन रबर की परत और उसके ऊपर कठोर रबड़ की सुरक्षा परत चढ़ाकर CTS केबल तैयार किया जाता है। यह एक, दो तथा तीन कोर में बनाया जाता है। इसे TRS केबल भी कहते हैं । इसका उपयोग नमी वाले स्थानों की वैद्युतिक वायरिंग में किया जाता है।
7. वाइंडिंग वायर
यह धातु की तार पतली, मजबूत, और लचीली तार या वायर होती है जिसे तांबे से बनाया जाता है, इसका स्तेमाल मोटर की वाइंडिंग करने के लिए किया जाता है जरूरत के अनुसान इनका आकार और मोटाई भिन्न भिन्न होती है।
8. VIR (वल्केनाइज्ड इंडिया रबर) तार
VIR (वल्केनाइज्ड इंडिया रबर) तार में मुख्य रूप से वाले टिन वाले कंडक्टर होते हैं जिसकी कोटिंग रबर से की जाती है । कंडक्टर की टिनिंग कंडक्टर को रबर से चिपकने से रोकती है। रबर की मोटाई मुख्य रूप से निर्भर करती है रबर की मोटाई मुख्य रूप से ऑपरेटिंग वोल्टेज पर निर्भर करती है। कंडक्टर को नमी से बचाने के लिए रबर इंसुलेशन के ऊपर एक कॉटन ब्रेडिंग की जाती है।
9. Lead sheathed wire
![]() |
| क्रेडिट: gravitaindia.com |
लैड शीथ कई प्रकार के तार और केबल में इन्सुलेशन पर उपलब्ध होती है। यह सीथ पूरी तरह से नमी प्रतिरोधी और बहुत टिकाऊ होती है। जहां यांत्रिक शक्ति और नमी प्रतिरोध दोनों की आवश्यकता होती है वहां लैड शीथ ( lead sheath ) और कवच के संयोजन का उपयोग किया जा सकता है। भूमिगत नलिकाएं और गीले स्थान विशिष्ट क्षेत्र हैं जहां लैड - शीथेड केबल का उपयोग किया जाता है।
यह भी पढ़ें:
वेयरिंग कितने प्रकार की होती है

